ग्राहक न आने से बर्बाद हो रहे फूल, नहीं निकल पा रहा लेबरों का भी खर्चा

लॉकडाउन में भले ही सरकार ने नर्सरी संचालकों को छूट प्रदान की हो, लेकिन इससे उन्हें फायदा नहीं हो पा रहा है। ग्राहक न आने के कारण नर्सरी सूनी पड़ी हुई है और फूल फेंकने पड़ रहें हैं। यहीं नहीं ग्राहक न मिलने के कारण लेबरों को भी जेब से वेतन देना पड़ रहा है।


कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के कारण मजदूर तबका तो परेशान है ही। नर्सरी संचालकों पर भी इसका सीधा असर पड़ा हुआ है। नर्सरी को प्रदेश सरकार की ओर से बंद नहीं किया गया है। उन्हें लॉकडाउन में छूट दे रखी है। लेकिन इसका उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा है।


वह इसलिए कि लॉकडाउन के कारण न तो लोग नर्सरियों तक पहुंच रहे हैं और न ही कोई शादी हो रही है। मार्च, अप्रैल और मई यह वह समय होता है, जब नर्सरी संचालकों की खूब कमाई होती है। क्योंकि इस समय शादियों का सीजन होता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण अधिकतर शादियां रद्द हो गई है, जिससे कि नर्सरी से कोई फूल नहीं खरीद रहा है।


चंद्रोटी में नर्सरी का संचालन करने वाले संजय क्षेत्री की मानें तो एकाध लोग ही नर्सरियों में पहुंच रहे हैं। यह वह सीजन था, जब उनकी कमाई होती थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण फूलों की बिक्री नहीं हो रही है। जिससे उनके फूल बर्बाद हो रहे हैं। हालत यह है कि मजदूरों का दिहाड़ी भी उन्हें जेब से देनी पड़ रही है।


इसी तरह दूसरे नर्सरी संचालक जोहडी गांव निवासी नंदलाल भी परेशान हैं। नर्सरी ही उनकी कमाई का जरिया है, लेकिन ग्राहक न आने के कारण फूलों को तोड़कर ऐसे ही फेंकना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर लॉकडाउन और ज्यादा रहता है तो उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।